जैविक खेती

जैविक खेती - Jaivik Kheti

बढ़ती हुई जनसंख्या को खाद्य आपूर्ति के लिए अधिक से अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए अनेक प्रकार की रासायनिक खादों, जहरीले कीटनाशकों का प्रयोग, प्रकृति के जैविक और अजैविक पदार्थो के बीच आदान-प्रदान के चक्र को (इकोलॉजी सिस्टम) प्रभावित करता है, जिससे कृषि भूमि की उर्वरा क्षमता खराब होती है, साथ ही साथ वातावरण दूषित होता है। जैविक खेती एक प्रक्रिया है जिसके द्वारा मिट्टी की उपजाऊ क्षमता में वृद्धि हो जाती है ताकि, कृषि भूमि लंबे अंतराल तक खेती लायक बनी रहे। जैविक खेती में सिंचाई के अन्तराल में वृद्धि होती है।

जैविक खेती: जैविक खेती में रासायनिक खेती की तुलना में बराबर या अधिक उत्पादन होता है अर्थात जैविक खेती मिट्टी की उर्वरता एवं फसलों की उत्पादकता बढ़ाने में पूर्ण रूप से सहायक है। वर्षा आधारित क्षेत्रों में जैविक खेती और भी अधिक लाभप्रद है। जैविक विधि द्वारा खेती करने से उत्पादन की लागत कम होती ही है और किसानों की आय भी अधिक प्राप्त होती है। आधुनिक समय में निरन्तर बढ़ती हुई जनसंख्या, पर्यावरण प्रदूषण, भूमि की उर्वरा क्षमता के संरक्षण एवं मानव स्वास्थ्य के लिए जैविक खेती की राह अत्यन्त लाभप्रद है । मानव जीवन के सर्वांगीण विकास के लिए अत्यन्त आवश्यक है कि प्राकृतिक संसाधन दूषित न हों, शुध्द वातावरण रहे एवं पौष्टिक आहार मिले, इस लिये हमें जैविक खेती की कृषि पध्दतियाँ को अपनाना होगा जोकि हमारे नैसर्गिक संसाधनों एवं मानवीय पर्यावरण को दूषित किये बिना सभी लोगों को खाद्य सामग्री उपलब्ध करा सकें तथा हमें खुशहाल जीने की राह दिखा सके।

जैविक खेती से लाभ

जैविक खेती में रसायनिक कीटनाशकों, उर्वरकों, और हार्मोन के उपयोग की जगह नैसर्गिक तत्वों का प्रयोग किया जाता है, जो खेती में अच्छी गुणवत्ता और पोषणशील उत्पादों का उत्पादन करते हैं। जैविक ऊर्वरकों का उपयोग करने से मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार आता है। मिट्टी की जल धारण क्षमता बढ़ती हैं। मिट्टी से पानी का वाष्पीकरण कम होता है।

जैविक खेती के प्रकार

जैविक खेती दो प्रकार की होती है, शुद्ध जैविक खेती एवं एकीकृत जैविक खेती।

  • शुद्ध जैविक खेती - इसमें सभी अप्राकृतिक रसायनों के बिना खेती की जाती हैं, और इनकी जगह, उर्वरक और कीटनाशक प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त किए जाते हैं।
  • एकीकृत जैविक खेती - इसमें पारिस्थितिक मानकों और आर्थिक मांगों को पूर्ण करने के लिए पोषक तत्व प्रबंधन और कीट प्रबंधन के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण शामिल है।

जैविक खेती करने के कुछ प्रमुख तरीके

  • फसल चक्र: विभिन्न प्रकार की फसलों को एक नियमित अंतराल पर उगाना जिससे की मिट्टी की उर्वरता और खरपतवारों को नियंत्रित किया जा सके।
  • हरी खाद: फसलों को मिट्टी में मिलाकर, मिट्टी को पोषण और जैविक उर्वरता को बढ़ने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है ।
  • जैविक खाद: गोबर, कम्पोस्ट, वर्मीकम्पोस्ट जैसी जैविक तरीके से तैयार खादों का प्रयोग करके मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाया जाता है।
  • जैविक कीट नियंत्रण: फसलों को कीटों से बचाने के लिए प्राकृतिक तरीकों का उपयोग करना, जैसे कि नीम का तेल, जैविक कीटनाशक, नीम की खली फेरोमोन ट्रैप आदि।

भारत में जैविक खेती:

भारत जैविक खेती के क्षेत्र में दुनिया में अग्रणी है। जैविक खेती को भारत में बढ़ावा देने के लिए कई सरकार की तरफ से कई महत्वपूर्ण पहल की गई हैं।

  • राष्ट्रीय जैविक कृषि मिशन (NMOOP): यह मिशन 2004 में शुरू किया गया था, इसका उद्देश्य जैविक खेती के अंतर्गत क्षेत्रफल और उत्पादन में बृद्धि करना है।
  • परम्परागत कृषि विकास योजना (PKVY): यह योजना 2015 में शुरू की गई थी, इसका मुख्य उद्देश्य परम्परागत कृषि तरीकों को बढ़ावा देना है, जिसमें जैविक खेती को भी शामिल किया गया है ।
  • जैविक खेती प्रमाणन कार्यक्रम: यह कार्यक्रम भारत सरकार द्वारा संचालित किया जाता है, जिसके अंतर्गत जैविक उत्पादों को प्रमाणित किया जाता है।